
रवि (नाम बदला गया) 28 वर्षीय आईटी कंपनी में काम करता है। अक्सर तनाव में रहता है — डेडलाइन, रिपोर्ट, टीम मीटिंग्स। साथ ही, उसे कई महीनों से पेट में ऐंठन, अचानक दस्त या कब्ज, और — सबसे परेशान करने वाला — गुद मोड़ने पड़ने जैसी होनाक (urgency) हो रही थी। डॉक्टर ने जांच के बाद अन्य गंभीर बीमारी नहीं पाई और बताया कि यह Irritable Bowel Syndrome (IBS) हो सकता है। जब रवि ने तनाव, चिंता, रात को नींद खराब होना आदि पर भी गौर किया, तो पता चला कि उसका मानसिक स्वास्थ्य और पाचन तंत्र आपस में जुड़े हुए हैं।
यह कहानी हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देती है — पेट की समस्या सिर्फ पेट की नहीं होती, मस्तिष्क-पाचन (brain-gut) संबंध बहुत मायने रखते हैं।
IBS क्या है?
IBS एक क्रॉनिक (दीर्घकालीन) पाचन तंत्र की समस्या है जिसमें पेट में दर्द या असहजता होती है, मल की अवस्था या आवृत्ति बदल जाती है (जैसे कब्ज होना, दस्त होना या दोनों का मिश्रण) — लेकिन इसके बावजूद आंतों में कोई स्पष्ट ऑर्गेनिक (यानी संरचनात्मक) रोग नहीं पाया जाता। PMC+2Cleveland Clinic+2
ध्यान दें: यह रोग बहुत आम है — विश्व स्तर पर लगभग 5-10 % लोगों में पाया जाता है। PubMed+1
प्रमुख लक्षण
- पेट में दर्द या ऐंठन, जो मल त्याग (evacuation) से थोड़ा कम हो सकती है। PMC+1
- मल का प्रकार बदलना: दस्त होना (diarrhoea), कब्ज (constipation) या दोनों का मिश्रण (mixed)
- पेट फूलना (bloating) या गैस की समस्या
- मल त्याग की त्वरित जरूरत महसूस होना (urgency) या मल त्याग के बाद अधूरा महसूस होना (incomplete evacuation)
- लक्षण दिन-रात, भूख-लगन, तनाव-स्थिति आदि से बढ़ सकते हैं
मानसिक स्वास्थ्य का दृष्टिकोण: तनाव और नकारात्मक सोच किस प्रकार पेट को प्रभावित करती है?
IBS में सिर्फ आंतों की समस्या नहीं होती — “मस्तिष्क-पाचन धुरी” (brain-gut axis) के माध्यम से मस्तिष्क, तंत्रिका, हॉर्मोन, प्रतिरक्षा एवं आंतों की शक्ति आपस में जुड़ी होती है। नीचे मुख्य मेकेनिज्म दिए गए हैं:

1. HPA धुरी (Hypothalamic-Pituitary-Adrenal axis) एवं ऑटोनॉमिक सिस्टम
- जब हम तनाव में होते हैं, तो HPA axis सक्रिय होती है, जिससे कोर्टिसोल और अन्य तनाव हॉर्मोन निकलते हैं। PMC+1
- यही हॉर्मोन आंत की गति (motility), संवेदना (visceral sensitivity), और पारगम्यता (permeability) को बदल सकते हैं। PMC
- ऑटोनॉमिक (स्वायत्त) तंत्रिका प्रणाली (sympathetic / parasympathetic) भी प्रभाव में आती है — अधिक सिम्पेथेटिक (उद्वेग-स्थित) गतिविधि आंतों में पेरिस्टालिसिस (गति) को बढ़ा सकती है या अनियमित कर सकती है। PMC+1
2. न्यूरोहॉर्मोनल परिवर्तन
- तनाव के दौरान, कॉर्टिको‐रिलीज़िंग हॉर्मोन (CRH), नॉरएड्रेनालिन (NE), सेरोटोनिन (5-HT) जैसे न्यूरोमेडिएटर्स बदल जाते हैं। MDPI+1
- उदाहरण के लिए, आंतों में सेरोटोनिन की शृंखला (gut serotonin system) प्रभावित होती है, जिससे मल प्रवाह, गैस, दर्द की अनुभूति बदल सकती है। PMC+1
- न्यूरोइम्यून क्रियाएँ (neuro-immune interactions) बढ़ जाती हैं — तनाव से आंत की जाल (mucosa) में सूजन एवं प्रतिरक्षा सक्रियता (immune activation) बढ़ सकती है। PMC+1
3. आंत-माइक्रोबायोटा-मस्तिष्क संबंध
- पाचन तंत्र में माइक्रोबायोटा (gut microbiota) की भूमिका बढ़ती जा रही है। तनाव और नकारात्मक सोच इन जीवाणुओं और उनके द्वारा बने मेटाबॉलाइट्स को प्रभावित कर सकती है। Frontiers+1
- इस प्रकार एक चक्र बन जाता है — तनाव → न्यूरोहॉर्मोनल/प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया → आंत में बदलाव → लक्षण बढ़ना → फिर से मानसिक तनाव।
4. उदाहरणात्मक स्थिति
मान लीजिए, आप किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए बहुत चिंतित हैं। अधिक कॉफी-चाय, नींद कम, देर से खाना-पेट में गैस-पन बढ़ना— इस स्थिति में आपका HPA धुरी सक्रिय होगी। आंतों की गति बदल सकती है, पेट फूल सकता है, मल की अवस्था अस्थिर हो सकती है। यदि आप “अब फिर से वही होगा, पेट खराब होगा” जैसी नकारात्मक सोच लेते हैं, तो यह मानसिक तनाव बढ़ा कर इस चक्र को और तीव्र कर सकती है।
समाचार और शोध में क्या मिला?
- एक अध्ययन में पाया गया कि IBS वाले लोगों में एंग्जायटी या डिप्रेशन का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा है। PMC+1
- समाचार में यह भी प्रकाशित हुआ कि योग अभ्यास ने भारत में IBS के रोगियों में न सिर्फ पेट के लक्षणों में सुधार किया बल्कि मानसिक स्वास्थ्य-स्तर (तनाव-चिंता) में भी कमी लाई। The Times of India
- एक अन्य समाचार में बताया गया कि तीन स्वस्थ आदतों- बिना धूम्रपान, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद- को अपनाने से IBS का जोखिम लगभग 42% तक कम हो सकता है। The Guardian
IBS – प्रबंधन (MANAGEMENT)
IBS का इलाज सिर्फ एक रास्ता नहीं है — यह बहु-मोडल (multi-modal) होना चाहिए — आंत, मन, जीवनशैली सभी को शामिल करके।
आंत के लिए
- ट्रिगर खाद्य (foods) की पहचान करें — जैसे मसालेदार भोजन, गैस बनाने वाले खाद्य, बहुत ज़्यादा कैफीन-शराब। Cleveland Clinic
- हाई-FODMAP आहार या आहार संतुलन पर गौर करें (हालाँकि यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं). Verywell Health
- नियमित भोजन-समय, धीमी गति से खाने-पेट को समय देना।
- डॉक्टर की सलाह से आवश्यक दवाएँ — जैसे मल-गति नियंत्रक, स्पाज्मोलेटिक आदि।
- मानसिक स्वास्थ्य के लिए
- तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान (meditation), गहरी साँस-लेना (deep breathing) मददगार।
- नकारात्मक सोच-पर काम: उदाहरण के लिए, “मेरा पेट फिर खराब होगा” जैसी सोच को चुनौती देना — एक तरह की Cognitive Behavioural Therapy (CBT) तकनीक। PMC
- नींद-गुणवत्ता सुधारना: नींद खराब होने पर IBS लक्षण बढ़ सकते हैं।
- मल्टी-डिसिप्लिनरी दृष्टिकोण: गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, डाइटिशियन, मनोचिकित्सक/मनोवैज्ञानिक के समन्वित देखभाल से बेहतर रिजल्ट मिलते हैं। PMC
- नियमित व्यायाम — मद्द से पाचन चलता रहता है और तनाव घटता है।
- पर्याप्त नींद (रात में ~7-8 घंटे) — समाचार में भी इसे महत्वपूर्ण बताया गया है। The Guardian
- धूम्रपान और बहुत अधिक शराब से बचें।
- समय-समय पर स्व-निरीक्षण करें — यदि पेट में असुविधा, बदलाव अधिक हो रहे हों, तो देर न करें।
- सकारात्मक सोच विकसित करें: “अगर आज पेट ठीक नहीं है, तो मैं अपनी दिनचर्या थोड़ा बदलूंगा”- जैसी सोच तनाव को नियंत्रित करती है।
- सामाजिक समर्थन — परिवार, मित्रों से बात करें; अकेले तनाव को लेकर रहना समस्या बढ़ा सकता है।
By Aniruddha Mindcare Clinic – January 01, 2026
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest
Labels: disorders, IBS, irritable bowel syndrome पेट की तकलीफ और मन
Location: Aniruddha Mindcare Clinic, Mumbai India. 307-A,Om Divya CHS LTD, Near Sona Shopping Complex , Fatak Road, W) Station, Trikamdas Rd, next to Kandivali, Kandivali, Jethava Nagar, Kandivali West, Mumbai, Maharashtra 400067, India
